Tue. Jul 14th, 2020

डीआरएमम अमिताभ के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बढा भ्रष्टाचार ,एनसीआर जोन के इला0 डीआरएम ऑफिस का जन सूचना अधिकार सेल नाकारा,नहीं मिलता है आरटीआई का सही जवाब,कई माह पेंडिंग रहती है आरटीआई, सवालों का गोलमोल व भ्रामक दिया जाता है जवाब

रेलवे एनसीआर के बेलगाम अधिकारियों का कारनामा, मांगी गई आरटीआई का नहीं मिलता है सही जवाब ,किए गए अपील में भी भ्रामक व असत्य दिए जाते हैं जवाब ।

👉 प्रयागराज भ्रष्टाचार का गढ़ है उत्तर मध्य रेलवे, जबकि अन्य रेलवे में जन सूचना का मिलता है सही जवाब ।

👉 कई अन्य अस्पतालों से मंगवाया गया है लोकल परचेज के माध्यम से सैनिटाइजर व मास्क ।

प्रयागराज । उत्तर मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय इलाहाबाद में जन सूचना अधिकार सेल में गड़बड़झाला चल रहा है । यहां पर जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाओं का अधिकारी गोलमोल जवाब एवं असत्य ,भ्रामक जवाब दिया करते हैं जिससे भ्रष्टाचार का खुलासा नहीं हो पा रहा है । इस तरह के गोलमोल जवाब देकर अधिकारी अपना पीछा छुड़ा रहे हैं जबकि अन्य जोन में जन सूचना अधिकार अधिनियम का जवाब सही समय पर मिलता है ।

बता दें कि इलाहाबाद प्रयागराज रेलवे में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी मजबूत है कि इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले को ही निपटा दिया जाता है । इलाहाबाद रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अमरनाथ झा द्वारा जनवरी माह से फरवरी तक मे लगभग 44 आरटीआई डीआरएम ऑफिस से जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई थी । जिसमें 29 का जवाब गोलमोल व असत्य एवं भ्रामक दिया गया है एवं आज भी 15 आरटीआई का जवाब नहीं मिला है जो पेंडिंग है ।

इन सब मामलों में 14 फरवरी 2020 से 8 मामलों में अपील की गई है । जिसमें चार अपील का जवाब असत्य, गोलमोल व भ्रामक तरीके से दिया गया है और चार अपील आज भी पेंडिंग है । इस तरह से देखा जाए तो रेलवे एनसीआर के डीआरएम ऑफिस इलाहाबाद में आरटीआई का जवाब सही तरीके से नहीं दिया जा रहा है ।

रेलवे डिपार्टमेंट में बैठे कुछ अधिकारियों द्वारा इन भ्रामक व असत्य तथा गोलमोल जवाब देने वालों पर कोई कार्यवाही भी नहीं हो रही है । यही वजह है कि इलाहाबाद रेलवे में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं । बता दें कि यहां पर 15-20 साल से कई कर्मचारी व अधिकारी एक ही जगह पर मठाधीशो की तरह अंगद की तरह पैर जमाए जमे हुए हैं ,जिनका कई बार ट्रांसफर हुआ है लेकिन वे लोग अपना ट्रांसफर रुकवा कर आज ही इलाहाबाद में ही जमे हुए । यह लोग कोरोना काल के महामारी में ऐसे लोगों की खूब चांदी रही है क्योंकि स्थानांतरण इस दौरान रोक दिए गए हैं इस वजह से लोगों चांदी रही है और खूब माल काटे है ।

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कोरोना और लॉक डाउन में कुछ विभागों की रही चांदी, क्योंकि सन्नाटा होने के कारण मनमानी तरीके से ठेकेदारों के द्वारा कराया गया है कार्य

केंद्रीय चिकित्सालय इलाहाबाद में सेनेटाइजर के नाम पर एवं मास्क,पीपीई किट के नाम पर टेंडर की खरीद मे गडबड़ी की हो रही है चर्चा ।

सूत्रों की मानें तो 50 रू0 लीटर का सैनिटाइजर ₹1000 लीटर में टेंडर रेट पर कोड किया गया है और वह भी सैनिटाइजर पानी की तरह कार्य कर रहा है ,यह चर्चा खुलेआम हो रही है । इसी प्रकार डीएनएचएम मे बड़े पैमाने पर सैनिटाइजर की खरीद हजारों लीटर में की गई है और इसकी गुणवत्ता खराब रही है । यदि इन मामलों की जांच कराई गई तो बड़ा घोटाला निकलने की बात की जा रही है ।

इसी प्रकार इंजीनियरिंग विभाग द्वारा प्लेटफार्म पर पत्थर लगाने का जो कार्य किया जा रहा है वह केवल पुराने मलवा डालकर बालू से चुनाई की जा रही है जिसको देखने वाला कोई नहीं है और कोरोना काल के बहाने अधिकारी एवं सुपरवाइजर अपने घरों एवं कमरों में बैठकर बिल पास कर रहे हैं । ठेकेदार व अधिकारी मिलकर रकम का बंदरबांट करके जेब भरे जा रहे हैं यह बहुत बड़ा जांच का विषय है ।

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