Thu. Oct 22nd, 2020

भारत के मजदूरों के सामने मौत ही मौत, कोरोना वायरस में मजदूरों की सुनियोजित हत्याएं

लाखों मजदूर पैदल चलकर महानगरों से अपने घरों को रवाना ।

रास्ते में हो गई हजारों लोगों की मौत ,आखिर मजदूरों के मौत का कौन है जिम्मेदार ।

देश में कोरोना वायरस महामारी के आने से भारत के मजदूरों की हालत बहुत खराब हो गई है । जहां लोग रोजी रोटी के लिए अपने घरों से अलग-अलग प्रदेशों महानगरों में पड़े थे वहीं थम गए लेकिन कुछ दिनों बाद उनके खाने-पीने के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया तो लोग पैदल ही अपने घरों के लिए रवाना हो गए ।

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए ट्रेन/बसों का पर्याप्त इंतजाम नहीं ! लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूर लम्बे इन्तजार के बाद परेशान एवं हताश होकर घर वापसी के लिए सड़क पर पैदल चलते हैं तो पुलिस की मार पड़ती है ! इधर उधर चलते हैं तो एक्सीडेंट में मौत मिलती हैं ! बच बचाकर निकल भी जाते हैं तो थकान से मौत मिलती है ! जहाँ रुके है अगर वहीँ रुकते है तो भूख से मौत का खतरा और काम पर जाते हैं तो कोरोना से मौत का खतरा !

सड़क एक्सीडेंट में कई दर्जन प्रवासी मजदूरों की मौत ! कई दर्जन प्रवासी मजदूरों की थकान से मौत!और अब 16 मजदूरों की औरंगाबाद महाराष्ट्र में रेल से कटकर मौत!

मोटा माल कमाने देश छोड़कर विदेश गए और कोरोना लेकर आये लाखों धनवान और बलवान लोगो की घर वापसी तो बहुत पहले करा दी गई बची- खुची अब कराइ जा रही है ! उनकी वापसी की चिंता सरकार को ज्यादा है ! जहाजों से वापसी कराइ जा रही है !

दूसरी तरफ
जब देश में कोरोना के 400 मरीज भी नहीं थे तब आदेश दिए गए कि जहाँ हो वही रहो ! सब इंतजाम कर दिया जायेगा ! ताली बजाओ, थाली बजाओ, घंटी बजाओ घंटा बजाओ, दिये जलाओ मोमबत्ती जलाओ, टोर्च जलाओ मोबाइल जलाओ और इनसे जब काम न चले तो फूल बरसाओ ! इतना ड्रामा करने पर जब कुछ नहीं हुआ और कोरोना मरीजों की संख्या 60000 तक पहुँच गई तो अब कह दिया, अपने अपने घर वापस जाओ !
ट्रेने और बसे जंग खा रही है ! ड्राइवर नींद से परेशान हैं ! अफसरों की घर पर ऐशोगाह बनी हुई है ! मगर मजदूरों की घर वापसी का कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं है !
क्या बेचारे इन गरीब मजदूरों को मरने की आजादी दे दी है..? कि जहाँ चाहो वहां मरो..? जब चाहो तब मरो..? जैसे चाहो वैसे मरो..?
नहीं नहीं
हम चिल्ला चिल्लाकर कहना चाहते हैं कि प्रवासी गरीब मजदूरों की ये मौत नहीं बल्कि सुनियोजित हत्याएं हैं ! इन दुखद घटनाओं के षड्यंत्रकारी व जिम्मेदार व्यवस्थापको और बार बार नया ड्रामा रचने वाले ड्रामेबाज हत्यारों को भी मौत की सजा होनी चाहिए तथा पीड़ित गरीब मजदूरों के परिवारों को 5 लाख नहीं बल्कि एक-एक करोड़ की आर्थिक सहायता तथा उनके परिवार के हर-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए !

A.n. jha – kaushambi

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