Wed. Apr 8th, 2020

रेलवे मुख्यालय एवं मण्डल में नहीं थम रहा भ्रष्टाचार, विभाग में लगी है बिना परमिट की सैकड़ों गाड़ियां, आरटीओ प्रयागराज नहीं ले रहा संज्ञान, राजस्व का हो रहा है भारी-भरकम नुकसान, भारत सरकार का लगा बोर्ड बना परमिट का माध्यम

नहीं थम रहा है रेलवे एनसीआर में भ्रष्टाचार 

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👉नहीं ले रहा है रेलवे बोर्ड अधिकारियों के इन कारनामों का संज्ञान
👉 नहीं ले रहा है प्रधानमंत्री कार्यालय एवं रेलवे मिनिस्ट्री संज्ञान ,आखिर कैसे होगा रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार की रोकथाम ।
👉आखिर कैसे होगा भारतीय रेलवे का कल्याण

यातायात पुलिस एवं संभागीय परिवहन विभाग प्रयागराज भारत सरकार लिखा गाड़ियों की जांच करने में बना असहाय

प्रयागराज । उत्तर मध्य रेलवे जोन मुख्यालय इलाहाबाद एवं मंडल कार्यालय तथा अन्य शहरों में अनुबंधित निविदा के आधार पर अधिकारियों के लिए लगाई गई गाड़ियां के परमिट फर्जी होने के बावजूद भी आरटीओ विभाग को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है । संभागीय परिवहन विभाग प्रयागराज भी आंख मूंद कर बैठा हुआ है ।

बता दें कि रेलवे मे 90% गाड़ियों के नंबर प्लेट कमर्शियल ना होकर प्लेटो का रंग सफेद होता है और परिवहन विभाग को एवं यातायात पुलिस को जांच करने में भ्रम इसलिए होता है क्योंकि गाड़ियों पर भारत सरकार लिखा होने या भारत सरकार का बोर्ड लगा होने की वजह से इनकी जांच नहीं हो पाती है । भारत सरकार का बोर्ड बना फर्जी वाहनों के अनैतिक कार्यों का धंधा है चुकी विभागीय अधिकारी इस मामले में ध्यान नहीं देते हैं ।

रेलवे में लगी गाड़ियों का अधिकांश रूप से दुरुपयोग हो रहा है, अधिकारियों के रिश्तेदारों ,दोस्त-यारों को इन गाड़ियों से सैर सपाटा कराया जाता है । यहां तक कि अधिकारियों के दूर-दूर गांवो तक भी यह गाड़ियां आव- भगत करने के लिए भेजी जाती हैं और रेलवे राजस्व को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है । अगर इस मामले में जांच कराई जाए और टोल टैक्स से सीसीटीवी कैमरे से फुटेज निकलवाई जाए तो इन गाड़ियों के माध्यम से हो रहे खेल का खुलासा होना तय हैं । यही कारण है कि रेल मंत्रालय कंगाल होते हुए भी इन अधिकारियों के कार्य प्रणाली पर लगाम लगाने की जुर्रत नहीं कर रहा है । जबकि बसों को लगाकर मुख्यालय एवं मंडल में गाड़ियों के खर्च का पैसा बचाया जा सकता है और यह रेल हित में है लेकिन अधिकारियों की लालफीताशाही एवं मनमानी की वजह से रेलवे का भारी भरकम नुकसान हो रहा है । रेलवे बोर्ड मूक दर्शक बनकर तमाशा देखता है इनके मनमानी पर कार्रवाई नहीं कर रहा है और ना तो इनके इन संसाधनों पर रोक लगा रहा है ।

इसी प्रकार अधिकारियों के बंगलों पर कई दर्जन सरकारी कर्मी लगे हुए हैं । जबकि चेयरमैन रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है और रेलवे बोर्ड के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है । डीआरएम के बंगले पर देखा जाए तो लगभग 5 दर्जन से ज्यादा कर्मचारी अंदर से बाहर तक आव-भगत और इनकी सेवा में लगे हुए हैं और रेलवे के कार्यों का नुकसान हो रहा है । यदि देखा जाए तो रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय ध्यान नहीं दे रहा है । चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से वेतन एवं पास एवं आर्थिक मामलों के कार्य कराए जा रहे हैं, जिसमें बहुत बड़ी अनियमितता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और सतर्कता विभाग इन सब मामलों को संज्ञान में नहीं ले रहा है । सतर्कता विभाग अधिकारियों की गाड़ियों एवं उनके बंगलों पर लगे कर्मचारियों की जांच न करने की खुली छूट अपने निरीक्षकों को दे रखी है कि इनकी जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं है । अब देखना है कि कौशांबी 22:00 की खबर उजागर करने के बाद उच्च अधिकारी एवं रेलवे बोर्ड तथा रेल मंत्रालय में बैठे अधिकारी हरकत में आते हैं या फिर आंख मूंद कर बैठे रहेंगे और इन अधिकारियों का यह कारनामा यूं ही चलता रहेगा यह जांच का विषय है ।

( अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415 )

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