Thu. Feb 27th, 2020

मंत्रियों की दोहरी शक्ति के खिलाफ मा0 सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका ,अमरनाथ झा पत्रकार एवं जनगणवादी भारत सहित 11 फरवरी को दाखिल हुई चार याचिका, मंत्रियों का संसद एवं विधानसभाओं में वोटिंग है असंवैधानिक

अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी ने मा0 सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका ।
👉 मंत्रियों की दोहरी शक्ति के खिलाफ 11 फरवरी को मा0 सुप्रीम कोर्ट में जनगणवादी भारत सहित कुल दाखिल हुई चार याचिकाएं ।

👉 संसदीय शासन प्रणाली एक धोखा है और गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। मिनिस्ट्री को लोकसभा और विधानसभाओं में सीट खाली कराकर इनकी जगह उपचुनाव कराकर हाउस के कोरम को पूरा करने की जरूरत है ।
👉 देश व प्रदेश मे असंवैधानिक तरीके से चल रही है सरकारें, संविधान के मुताबिक कार्य नहीं करती है मिनिस्ट्री । मंत्रियों की दोहरी शक्ति है असंंवैैैधानिक ।

कौशाम्बी से अमरनाथ झा जनगणवादी भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पत्रकार हिंदी खबर तथा जनगणवादी के राष्ट्रीय निदेशक एडवोकेट हाई कोर्ट एपीएन गिरी सहित कुल 4 याचिकाएं माननीय सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में 11 फरवरी को मंत्रियों की दोहरी शक्ति के खिलाफ याचिका दायर की गई है । मंत्रियों को संविधान के उपबंधो के अंतर्गत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार और मंत्रियों को भारत के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों एवं हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तथा अन्य जजों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग करने का अधिकार नहीं है । इसी प्रकार राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग पर मत देना और मंत्रियों द्वारा किसी भी विधेयक पर चाहे वह वित्त विधेयक हो या धन विधेयक हो अथवा अन्य विधेयक हो उस पर वोटिंग करने का अधिकार संविधान में नहीं है लेकिन यह लोग वोटिंग करके असंवैधानिक कार्य करते हैं ,जिस पर रोक लगाने की जरूरत है । इस मामले में आखिर यह लोग किस अधिकार के तहत वोटिंग करते हैं, इस पर याचिका दाखिल की गई है ।

मा0 सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि उनको अधिकार नहीं हैं तो तत्काल उनको रोका जाए कि वह उपरोक्त परिस्थितियों में सदन मे या सदन के बाहर राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव में कतई भाग ना ले सके । इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति के चुनाव मे स्कूल की लिस्ट में से मंत्रियों का नाम तत्काल प्रभाव से हटाने के लिए आज के स्कूल कॉलेज की लिस्ट को समाप्त किया जाए ।

राष्ट्रपति व राज्यपाल को निर्देश दिया जाए कि वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 और 193 के अंतर्गत मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से सांसद की सभाओं में मंत्रियों को आयोग्य बनाते हुए संसद की सभाओं से खाली कराया जाए । इसी प्रकार विपक्षी संख्या 5, 6 और 7 अर्थात चुनाव आयोग को और संसद की सभाओं और अन्य राज्यों की विधानसभाओं के मंत्रियों के बिना केवल सांसदों से उनकी रिक्ति की पूर्ति की जाए । जिससे सांसद और मंत्रिपरिषद अलग-अलग पहचाना जा सके ।

इसी प्रकार कोई भी उचित याचिका उच्च न्यायालय अपने जनकल्याण के रूप में पारित करना चाहती है यह अनुतोष (प्रेयर ) की गई है।

इस रिट का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका को सांसद से अलग रखने के लिए दाखिल की गई है ,जिसमें मंत्री परिषद के मंत्री कार्यपालिका में सरकार बनकर और सांसद की सभाओं में बहुमत बनाकर संसद की निर्णय को मनमानी बनाते हैं और हम भारत के लोगों पर शासन करते हैं । इनके इन कृत्यों का विरोध करना है जिससे सरकार में पक्षपात और फर्जी सरकार समाप्त हो सके तथा गणतंत्रात्मक शासन प्रतिस्थापित हो सके ।

हमारा कहने का तात्पर्य है कि भारत में संसदीय शासन प्रणाली उच्चतम न्यायालय के द्वारा प्रतिपादित संविधान के मूलभूत ढांचा का उल्लंघन है ,जैसे संविधान के साथ फ्राड किया गया है । संविधान के अंतर्गत आर्टिकल 74 , 75 , 88 ,तथा आर्टिकल 100 , 101 ,102 का पालन नही हो रहा है । इसे लागू करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अमरनाथ झा पत्रकार सहित कुल 4.याचिकाएं 11.फरवरी को दाखिल की गई है जिसकी केश डायरी संख्या 5594/20 एवं 5609/20 है ।

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