Thu. Oct 22nd, 2020

प्रयागराज मंडल में धान खरीद के नाम पर हुई लूट, प्राइवेट एजेंसियों व अधिकारियों की मिलीभगत से हुई लूट, करोड़ों का हुआ घोटाला, 50% से ज्यादा हो चुका भुगतान, नहीं हुई कोई जांच

धान खरीद में हुआ घोटाला,बिचौलियों व अधिकारियों ने किसानों के हक को जमकर लूटा ।
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👉 प्राइवेट एजेंसियों ने धान खरीद की आधे अधूरी लेकिन लूट किए पूरी ।
👉 अधिकारियों की मिलीभगत से इलाहाबाद मंडल में हुआ जमकर लूट घसोट ,करोड़ों का हुआ वारा न्यारा ।
👉 जिले के अधिकारियों के रिकमेंट के बाद प्राइवेट एजेंसियों के पैसे का हो जाता है भुगतान , नहीं देता है कोई ध्यान ।
👉 आला अधिकारियों का बंधा होता है कमीशन, इसलिए नहीं होती है कोई जांच ।
👉 सूत्रों की माने तो जनप्रतिनिधियों ने संज्ञान लेकर कर लिया निर्मल गंगा यात्रा के नाम पर खेल ।
👉 यह है कौशाम्बी की कला, सबका हो भला ।

प्रयागराज मंडल में लगभग अरबों कु हो चुकी है धान खरीद

कौशाम्बी । प्रयागराज मण्डल में धान खरीद के नाम पर करोड़ों रुपया का वारा न्यारा व घोटाला किया गया है लेकिन इस मामले में जांच करने के नाम पर अधिकारियों की चांदी हो जाती है । कौशाम्बी जनपद में सर्वत्रा, यूपी एग्रो ,श्री कुबेर, ओम कृषक आदि आधा दर्जनों से ज्यादा प्राइवेट एजेंसियो ने धान खरीद की है ।

कौशाम्बी ,इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में धान मिलर बिचौलियों और प्राइवेट एजेंसी ने मिलकर फर्जी धान खरीद की हैं । इन प्राइवेट एजेंसियों ने कहीं-कहीं नाम मात्र के सेंटर तो बनाए और सेंटर प्रभारी ऐसे लोगों को नियुक्त किए हैं जिनको जानकारी ही नहीं है कि वह सेंटर प्रभारी है और उनके सेंटर पर कितनी खरीद हुई है । सेंटर कहां बना है कोई पता नहीं है लेकिन करोड़ों में सेंटरों पर खरीद हो चुकी हैं । जैसे कौड़िहार ब्लाक के जैन का चायल के तिल्हापुरमोड़ मखउपुर, अगियौना ,हर्रायपुर, अढौली आदि तमाम सेंटर हैं । सरकार की यह योजना जो किसानों के लिए चलाई गई है इस मामले में किसानों के नाम पर अधिकारी और बिचौलियों व मिलरो ने मिलकर पूरी लूट कर के करोड़पति हो गए है ।

बता दें कि पिछले दिनों हिंदी खबर ने धान खरीद में हुए घोटाले की खबर चलाई थी जिस पर कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर और डिप्टी आरएमओ कौशांबी ने जांच कराकर कार्रवाई की बात कही थी लेकिन सूत्रों की मानें तो इन प्राइवेट एजेंसी धारकों से जनप्रतिनिधियों ने बुलाकर निर्मल गंगा यात्रा के नाम पर खेल कर लिया है और घोटालेबाज एजेंसियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है ।

बता दें कि इलाहाबाद मंडल में कुल 317 सेंटर बनाए गए हैं जिसमें 316 सेंट्रो पर खरीद हुई है । मंडल में 4,1 5150 मीट्रिक टन कुल धान खरीद का लक्ष्य था जिसके सापेक्ष 3,74663.851मी0 टन धान की खरीद हुई है । देखा जाए तो कौशांबी में 48 केंद्रों पर 52250 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 50448.772 मी0टन खरीद हुई ,वही प्रयागराज में 145 सेंटर पर 193000 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष कुल 183568.229 मी0 टन की खरीद हुई है । इसी तरह फतेहपुर में 68 क्रय केंद्रों पर 110000 मी0 टन लक्ष्य के सापेक्ष 109129.940 मीट्रिक टन खरीद हुई तथा प्रतापगढ़ में 58 सेंट्रो पर 59900 मी0 टन के सापेक्ष 31516.910 मीट्रिक टन धान खरीद हुई है । अगर देखा जाए तो कुल धान खरीद का मंडल का प्रतिशत 90.248 मी0 टन रहा है ।

बता दें कि इन प्राइवेट एजेंसियों ने सेंटर पर खरीद ना करके बिचौलियों और धान मीलरो से सांठगांठ करके किसानों के नाम पर खरीद कर लिया है और राइस मिलर तथा बिचौलिए एवं अधिकारी के मिलीभगत के इस खेल में सब को करोड़ों का फायदा हुआ है । इस मामले में जांच हुई तो कौशांबी में धान खरीद में लगी 7 प्राइवेट एजेंसियां तथा इलाहाबाद एवं फतेहपुर व प्रतापगढ़ में लगी प्राइवेट एजेंसियों को पैसे का भुगतान रुक जाना तय है ।

इसी तरह फतेहपुर में भी नैफेड के 3 सेंटर फर्जी चले हैं l अशोथर, बशेडी , बुधरामऊ, आदि तथा कौशांबी में सर्वत्रा, श्री कुबेर, ओम कृषक सहित तमाम एजेंसी तथा प्रतापगढ़, इलाहाबाद में भी इसी तरह किया गया है लेकिन विभागीय उच्च अधिकारियों के मिलीभगत से इन सब का पैसा भी 50% से ज्यादा भुगतान हो चुका है ।

बता दें कि इस मामले में आरएफसी प्रयागराज व डिप्टी आरएमओ विपिन कुमार प्रयागराज से भी मौखिक सिकायत की गई है लेकिन आरएफसी इलाहाबाद में मामले में यह कह कर टाल गए कि क्योंकि यह जिले में खरीद का मामला है इसलिए जिले के ही अधिकारी ही जिम्मेदार है उनसे कोई मतलब नहीं है । बता दें कि मंडल के धान क्रय केंद्रों पर खरीद के समय उच्च अधिकारियों के दौरा करके जांच करने का प्रावधान है लेकिन मंडल एवं जिले के आला अधिकारियों ने धान खरीद सेंटरों पर दौरा करके जांच नहीं किया नहीं तो इन प्राइवेट एजेंसियों द्वारा हुए मनमाने लूट पर अंकुश लगता ।

यदि जांच हुई तो इन एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड एवं केंद्र प्रभारियों के खिलाफ f.i.r. होना तय है । अब देखना है कि अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करते हैं या फिर उन तक इस भारी-भरकम रकम का हिस्सा पहुंचने के बाद शांत हो जाते हैं यह जांच का विषय है ।

अमरनाथ झा – पत्रकार ‘ 8318977396

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