Thu. Feb 27th, 2020

इलाहाबाद रेलवे में सिग्नल एवं टेलीकॉम डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार, करोड़ों का रेलवे में हुआ घोटाला ,विकास के नाम पर मिली खुली छूट, तो अधिकारियों ने की जमकर लूट, ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत का कारनामा

इलाहाबाद मे रेलवे के सामानो की खरीद में हुई जमकर धांधली । विकास के नाम पर जमकर हुई खरीददारी, समय से पूर्व कंडम किए गए सामान, नई है सामानों का कोई ब्यौरा एवं अता पता ।

👉 स्टॉक वेरी फायर और ऑडिट विभाग आंख मूंद कर बैठा, नहीं किया कोई कार्यवाही और निरीक्षण
👉 जल्दी-जल्दी बदले गए सीसीटीवी कैमरे और स्टेशनों पर एलईडी टीवी व डिजिटल बोर्ड, मंगाए गए सामानों की कीमत कई गुना बाजार से ज्यादा कीमत पर हुई खरीदारी ।
👉 सिग्नल एवं टेेेलीकाम  विभाग का गजब कारनामा ,अधिकारियों की मिलीभगत भगत से होता है खेल

उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद एवं मंडल कार्यालय क्षेत्र में भ्रष्टाचार इस तरह इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि रेलवे में सिग्नल और टेलीकॉम डिपार्टमेंट का हाल बहुत बुरा है । इस डिपार्टमेंट के अंतर्गत ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से कमीशन खोरी इतनी जबरदस्त हुई है कि पिछले 5 सालों में जमकर खरीदारी हुई और बाजारू कीमत से कई गुना ज्यादा बिल वाउचर बनाकर सामान खरीदे गए और रेलवे को अरबों का चूना लगाया गया है । जिसमें सीबीआई की रेड पड़ी और दो अधिकारी पकड़े भी गए लेकिन मेन विभाग का मुखिया ऊंची पकड़ के कारण अपने को बचाने में कामयाब रहा है । इसके बाद से उक्त मामले में आज तक कोई खुलासा नहीं हुआ है और यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है ।

बता दें कि जांच कराई गई तो इस तरह डिपार्टमेंट में बहुत बड़ा घोटाला का खुलासा होना तय है । इसी तरह रेलवे के इस डिपार्टमेंट में तमाम एलईडी टीवी, डिजिटल बोर्ड, और सीसीटीवी कैमरे बहुत जल्दी जल्दी खरीदे गए कुछ दिनों के लिए एडवरटाइजिंग की तरह लगाए तो गए लेकिन 6 महीने के अंदर ही सब बदल दिए गए और यह सामान गायब कर दिए गए हैं और लोगों के घरों मे पहुंचा दिए गए है । यदि लेजर से मिलान कराया जाए तो बहुत बड़ी अनियमितता है देखने को मिलेगी ।
सामानों का स्टॉक में कहीं अता पता नहीं है, इन सामानों का कंडम भी नहीं कराया गया है और यदि जांच हुई तो स्टाक वेरी फायर से जुड़े हुए लोग व जांच एजेंसियां संदेह के दायरे में आ सकते हैं ।

बता दें कि रेलवे डिपार्टमेंट को उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से भारी भरकम रेलवे राजस्व को चूना लगाया गया है । यदि इन 5 सालों के कार्य के रिकार्डों की जांच कराई गई तो कई अधिकारियों का फंसना तय है ।
बता दें कि रेलवे एनसीआर इलाहाबाद में 15 -20 वर्षों से कई अधिकारी एनसीआर नहीं छोड़ रहे हैं । यही कारण है कि यहां बोर्ड तक लंबी सेटिंग बना रखे हैं और मंत्रालय भी उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है । अब देखना यह है कि कौशांबी वॉइस की खबर के उजागर होने के बाद सिग्नल एवं इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के काले कारनामों का खुलासा होता है या फिर सब कुछ फाइलों में ही दबकर रह जाएगा यह जांच का विषय है ।

बता दें कि भ्रष्टाचार इस कदर सर चढ़कर बोल रहा है की मंडल कार्यालय एवं रेलवे एनसीआर इलाहाबाद के मुख्यालय में लगाए गए डिजिटल सिग्नेचर को फेल किया गया है । ताकि यहां के कर्मचारी मनमाना कर सके और समय से नौकरी में ड्यूटी ना कर सके । जब चाहे मनमानी तरीके से गायब हो सके, इस पर सरकार के करोड़ों रुपए खर्च किए गए ताकि मोदी सरकार ने अधिकारियों कर्मचारियों को टाइम से नौकरी आने जाने के लिए अटेंडेंस के लिए थंब इंप्रेशन का सिस्टम लगाया है । डिजिटल सिग्नेचर हेतु मशीन लगाई है लेकिन कहावत है कि ” तू डाल डाल तो मैं पात पात ” । इसी तर्ज पर इन अधिकारियों ने सरकार की इस योजना को फेल करने के लिए आज तक एनसीआर के मुख्यालय और मंडल कार्यालय में यह थंब इंप्रेशन के डिजिटल सिगनेचर यहां काम नहीं कर रहे हैं । फॉर्मेलिटी के लिए लगाए गए सरकार का इसमे करोड़ों रुपया खर्चा हुआ है लेकिन अधिकारियों ने इसे नाकाम करके थोथे साबित कर दिया है और आज भी कर्मचारी मनमानी तरीके से लेट- लपेट आते हैं और मन मर्जी के मुताबिक गायब हो जाते हैं ।

सरकार का ठीक से काम नहीं करते हैं और कुर्सियों से हमेशा गायब रहते हैं । अगर इस मामले में जांच कराई जाए तो कहीं ना कहीं अधिकारियों का हाथ होना तय है । इस योजना को फेल करने में अधिकारी व कर्मचारी मिले हुए हैं यदि ऐसा ना होता तो यह सिस्टम फेल ना होता । यदि एनसीआर मुख्यालय और मंडल कार्यालय में डिजिटल सिग्नेचर सही तरीके से लागू हो गया तो रेलवे के कर्मचारी जो मनमानी तरीके से नौकरी में आते और जाते हैं तथा कुर्सियों से गायब रहते हैं उनकी मनमानी पर रोक लगगी और रेलवे के कार्यप्रणाली में सुधार आने की काफी संभावना है । अब देखना है कि रेलवे के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और कितना ध्यान देते है यह जांच का विषय है ।

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