Thu. Feb 27th, 2020

रेलवे इलाहाबाद जोन कार्यालय एवं डीआरएम कार्यालय में भ्रष्टाचार,भ्रष्टाचारियों पर नहीं होती कोई कार्यवाही, आरटीआई का भ्रामक ,गोलमोल देते है जवाब,रेलवे बोर्ड मे बैठे अधिकारी नही लेते संज्ञान

रेलवे में जितना बड़ा जोन उतना ही बड़ा घोटाला ।
👉आरटीआई का गोलमोल व भ्रामक देते हैं जवाब ,उच्च अधिकारी भी नहीं देते हैं ध्यान ।

👉आखिर कैसे लगेगा भ्रष्टाचार में डूबे इन भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम,रेेेलवे बोर्ड मे बैैठे अधिकारी नही लेेेते संंग्यान ।
👉 जन सूचना अधिकार के तहत मांगे गए सवालों के मिले जवाब में होता है संदेह ।

भ्रष्टाचार मे लिप्त लोगों को पाल रखें है अधिकारी,डीआरएम के बंगले पर सेवा मे लगे है पचासो कर्मचारी ।

मोदी सरकार को बदनाम कर रहे रेलवे के अधिकारी,चाटुकारो के इसारे पर काम करते है अधिकारी

इलाहाबाद / प्रयागराज । उत्तर मध्य रेलवे के मुख्यालय एवं इलाहाबाद मंडलीय रेलवे कार्यालय के अधिकारी भ्रष्टाचार में इस कदर से डूब गए हैं कि इनको भ्रष्टाचार मुक्त करना मोदी सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है । रेलवे के अधिकारी मोदी सरकार के मंसूबों पर पानी फेरना चाह रही है यही वजह कि भ्रष्टाचार की खबरें मीडिया में आने के बाद भी अधिकारी ना तो कोई संज्ञान लेते हैं और ना ही भ्रष्टाचार में लिप्त भ्रष्ट कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही करते हैं । जिससे यह साबित होता है कि उच्च अधिकारी एनसीआर के तथा डीआरएम ऑफिस के मुखिया इन भ्रष्ट एवं कामचोर तथा फ्री में बैठकर लेने वाले तनख्वाह जो रेलवे राजस्व को चूना लगा रहे हैं उनसे मिले हुए हैं । इन सारी खबरों को रेलवे बोर्ड भी संघ में बैठे उच्च अधिकारी मेंबर और सेक्रेटरी संज्ञान नहीं ले रहे हैं और ना तो इन सब खबरों को रेल मंत्री को भी अवगत नहीं करा रहे हैं जिससे सरकार की छवि खराब हो रही यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेलवे बोर्ड के वर्चस्व को एवं पद को समाप्त करना चाह रहे हैं जिससे कि इनका तिलिस्म टूट सके । चूंकी भारी-भरकम अधिकारियों की यह फौज जो रेलवे बोर्ड में बैठी हुई है वह कोई काम नहीं कर रही है बल्कि निचले स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को संरक्षण देने का काम कर रही है ।

यही वजह है कि नीचले स्तर पर कामचोर कर्मचारी एवं भ्रष्टाचार में डूबे लोगों को उच्च अधिकारी डीआरएम और जीएम ऑफिस से संरक्षण प्राप्त है और काली कमाई का यह फलने फूलने वाला कारोबार का हिस्सा ऊपर तक माहवारी के रूप में बना हुआ है । जिससे उच्च अधिकारियों के कान में शिकायत मिलने के बावजूद भी जूंं नहीं रेंग रही है । यदि देखा जाए तो डीआरएम इलाहाबाद एवं ऐसे तमाम अधिकारियों के यहां कई दर्जन रेलवे कर्मचारी लगे हुए हैं जिसका नुकसान रेलवे राजस्व का हो रहा है । इन अधिकारियों के बंगलों की अगर जांच कराई जाए लाल फीताशाही का नशा की कलाई खुलना तय है । यदि देखा जाए तो रेलवे कर्मचारियों का लगभग 20% स्टाफ इन अधिकारियों की सेवा आवभगत करने में लगा रहता है और मेहनतकश कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जाता है और उनको चार्जशीट दी जाती है । वहीं दूसरी तरफ कामचोर एवं भ्रष्ट कर्मचारियों को जो इन अधिकारियों की चाटुकारिता करते हैं उन्हें अवार्ड तथा अनैतिक तरीके से आर्थिक लाभ कमाने का मौका दिया जाता है एवं उनके इशारे पर इमानदार कर्मचारियों को परेशान किया जाता है । उदाहरण के तौर पर डीआरएम ऑफिस में कई दर्जन ईमानदार कर्मचारियों को उनके विभाग से हटाकर सीनियर डीपीओ कार्यालय में अटैच कर रखा है और उनकी पोस्टिंग नहीं की जा रही है जिन्हें फ्री में बैठाकर तनखाह दिया जाता है जो रेलवे राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान है ।

बता दे कि रेलवे डीआरएम सहित तमाम अधिकारियों के बंगले पर कई दर्जन कर्मचारी इनकी देखरेख एवं आव भागत सेवा में लगे हुए हैं जबकि बिजलेंस गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी अधिकारी के यहां इतने लोगों को रखने का प्रावधान नहीं है । इन अधिकारियों के बंगले पर करोड़ों रुपए आलीशान और राजशाही ठाट बाट को साज-सज्जा सजावट के रूप में हर वर्ष खर्च होते हैं और वही कर्मचारियों की कालोनियों में गंदगी व बदबू आ रही है और उनके आवास जर्जर पड़े हुए हैं, उनको मेंनटेन नहीं किया जाता है । अधिकांश ठेकेदार इन अधिकारियों के जो चाहते हैं वह घटिया क्वालिटी के पीली ईंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन यह अधिकारी आंख मूंद पर आंख पर पट्टी बांधकर अपने एसी कमरों में बैठे हुए हैं और कोई सुपरवाइजर इन ठेकेदारों के कार्यों का निरीक्षण नहीं करता है ।

बता दें कि पिछले काफी समय से रेलवे में एनसीआर जोन एवं डीआरएम ऑफिस में मांगी जा रही जन सूचना का उत्तर भ्रामक एवं गोलमोल और असत्य दिया जाता है । इसी के साथ साथ जो सूचनाएं मांगी जाती है उन प्रश्नों का उत्तर ना देकर आधा-अधूरा और तोड़-मरोड़ कर गुमराह करके जवाब दिया जाता है और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम किया जाता है, जिसको ना तो नोडल अधिकारी ध्यान देते हैं और ना तो उच्च अधिकारी ध्यान देते हैं । जिससे यह साबित होता है कि उन अधिकारियों के इशारे पर ही यह सब झूठे और असत्य गोलमोल जवाब दिए जाते हैं क्योंकि सही जवाब देने पर विभाग के काले कारनामों का खुलासा होना तय है । यही वजह है कि वह अपनी पतलून को संभाले हुए है और जन सूचना अधिकार का जवाब सही नहीं देते हैं ।

बता दें कि दिनांक 30 जनवरी 2020 को मांगी गई जन सूचना में जो उत्तर दिया गया है क्रम संख्या 1 का जवाब अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है । क्रम संख्या दो में भी जवाब नहीं दिया गया है और क्रम संख्या तीन में समस्त विभागों की कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी जो केवल यांत्रिक विभाग की सूची उपलब्ध कराकर काम समाप्त कर दिया गया है । जबकि सभी विभागों की सूची देना नियमानुसार अनिवार्य था । इसी प्रकार अन्य सूचनाओं का गोल जवाब दिया जा रहा है जिससे आवेदक का पैसा और वक्त बर्बाद होता है और पुन: अपील में व सीआईसी में ज्यादा पड़ता है ।

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