Sat. Jan 25th, 2020

आखिर कब दूर होगा रेलवे उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर से भ्रष्टाचार ,जोरों पर चल रहा है रिफरल का धंधा, प्राइवेट अनुबंधित अस्पतालों को पहुंचाया जाता है फायदा, नहीं होती है बिलो की कोई जांच ,कर्मचारियों से अधिकारियों की बंधी है माहवारी

सीएमएस रेलवे अस्पताल कानपुर ने माना की 33 साल की नौकरी में कानपुर अस्पताल बद से बदतर ।

👉 सीमस ने अपने कार्यकाल में क्या किया चिकित्सालय में सुधार
👉 क्या किसी फार्मासिस्ट का किया स्थानांतरण 20-20 वर्षों से जमे हैं एक ही जगह पर एक ही कुर्सी पर लोग
👉 उनको नहीं लगाई जाती है इमरजेंसी ड्यूटी, केवल कमाऊ सीट पर बैठा कर रखा है सीएमएस

👉 4 साल से अधिक होने के बावजूद भी एक ही फार्मासिस्ट से करा रहे हैं बिलो का सत्यापन ।

इंश्योरेंस करके इससे आधे खर्च पर एक छत के नीचे कर्मचारियों को हो सकता है बेहतर इलाज ।

कानपुर रेलवे के उप मंडलीय चिकित्सालय में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है यहां रिफरल का धंधा जोरों पर चल रहा है और रिपर की हुई हुए डॉक्टरों से विलो का सत्यापन भी नहीं कराया जाता है । बिलो को रिफर किए हुए डॉक्टरों से ना करा कर फार्मासिस्ट के ऊपर छोड़ दिया जाता है और बिलों में कोई कटौती या महंगी दवाओं का देखरेख नहीं किया जाता है । सीएमएस कानपुर ने अपने कार्यकाल में अनुबंधित अस्पतालों से सिर्फ उगाही करने का कार्य किया है । यही वजह है कि अस्पताल में जन्मदिन मनाना, स्टेशनरी लेना , फंक्शन के नाम पर चंदा वसूली करना जैसे तमाम कार्य होते रहे और प्राइवेट अस्पतालों से रकम वसूले जाते हैं ।

उत्तर मध्य रेलवे के उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर में भ्रष्टाचार अभी भी कायम है ।

रेलवे उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर सीएमएस पी0के सरदार ने इस बात को माना है कि 33 साल की सेवा में कानपुर का स्तर नर्क बना हुआ है जिसकी खबर एक अखबार में इनके बयान के मुताबिक उजागर हुआ है लेकिन उन्होंने रेलवे के चिकित्सालय में कोई सुधार ना करके संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है ।

बता दें कि लगभग 20 वर्षों से एक ही हेल्थ युनिट एवं चिकित्सालय मे फार्मासिस्ट जो दोनों यूनियन के पदाधिकारी है वे उगाही कर कमाई कर रहे हैं । एक फार्मासिस्ट को सिक फिट का ठेका दे रखा है और दूसरे फार्मासिस्ट को स्टोर में टेंडर का दवाओं और इम्प्लांट की खरीद का ठेका दे रखा है । जिसमें दोनों अपनी मनमानी और नियमों को ताक पर रखकर धन उगाही करने में जुटे हुए हैं । इनके बारे में एवं इनके कारनामों के बारे में सीएमएस कानपुर को पूर्ण जानकारी होते हुए भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

बता दें कि रेलवे अस्पताल में अनुबंधित अस्पतालों से जन्मदिन के नाम पर स्टेशनरी एवं फंक्शन के नाम लम्बी रकम वसूली जाती है और प्राइवेट अस्पताल उसकी भरपाई बिलों से करते हैं क्योंकि कोई भी बिल उचित तरीके से सत्यापित नहीं किया जाता है । यह रकम इंजेक्शन व बिलों में दर्शाए जाते हैं और उनका अवलोकन ना तो फार्मासिस्ट करते हैं और ना डॉक्टर करते हैं जिससे रेलवे के राजस्व को लाखों रुपए का चूना लग रहा है । सीएमएस कानपुर पी0के सरदार ने सीएचआई में भी कोई नियंत्रण नहीं रखा है । तमाम लोग माहवारी देकर अभी भी कर्मचारी घरों में आराम फरमा रहे हैं और ₹7000 महीने की दर से 40 कर्मचारी कार्य पर नहीं आ रहे हैं । जिसका पूरा धन की उगाही एवं बंटवारा सीएमएस एवं सिंचाई तथा एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बीच बंदरबांट हो रहा है । रकम अधिकारियों में बंदरबांट होता है और सीएमएस कानपुर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के गाड़ी पर बैठकर कॉलोनी का निरीक्षण करते हैं तथा सीएचआई से बात नहीं करते हैं ।

बता दें कि सीएमएस कानपुर ने इसी तरह एक डॉक्टर को रिफरल का धंधा करने के लिए बैठा रखा है जो कोने में बैठकर सिर्फ मरीजों को रिफर करता है । उस डॉक्टर को सतर्कता विभाग ने सभी महत्वपूर्ण कार्यों पर रोक लगा रखी है, इसके बाद भी सीएमएस कानपुर उसी से सारे कार्य करा रहा है, इसके पीछे कोई गहरी साजिश है । इसी प्रकार एनसीआर मुख्यालय में पी0 मुरमुर के एक ही पद पर 7 वर्ष हो जाने के बाद भी आज तक स्थानांतरण नहीं किया गया है क्योंकि ऊपर से नीचे तक पूरा एक रैकेट कार्य कर रहा है । जिसके कारण कानपुर चिकित्सालय एवं इलाहाबाद केंद्रीय चिकित्सालय की स्थिति बद से बदतर बनी हुई है और यहां धड़ल्ले से एलपी दवाओं का धंधा जोरों पर चल रहा है ।

बता दें कि जो भी टेंडर किए जाते हैं उसमें मैन पावर पूरी तरह लगाई नहीं जाती है और आधे मैन पावर पर कार्य कराया जा रहा है ,बाकी पैसा अधिकारियों में बंदरबांट किया जा रहा है । यही वजह है कि नीचे से लेकर ऊपर तक डीआरएम ऑफिस और एनसीआर तक इनकी चैन बनी हुई है । यही कारण है कि चिकित्सा विभाग रेल को खा रहा है और रेलवे को कंगाल बना रहा है । यही वजह है की पीसीएमडी और डीजी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं ताकि नीचे से लेकर ऊपर तक लूट का या धंधा जारी रह सके ।
कौशांबी वॉइस की रेलवे एनसीआर एवं मंडलीय कार्यालय की तमाम भ्रष्टाचार की खबर उजागर होने के बाद भी ना तो मंत्रालय सक्रिय हो रहा है और ना ही रेलवे बोर्ड के अधिकारी संज्ञान ले रहे हैं । शायद नीचे से लेकर ऊपर तक करप्शन की जड़े इतनी गहरी है कि खबरें उजागर होने के बाद भी ऊपर के लोग इन करप्शन में डूबे अधिकारियों पर कार्रवाई करने में बेबस है ।

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