Fri. Dec 6th, 2019

रेलवे के केंद्रीय चिकित्सालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, एमडी के संरक्षण में फल-फूल रहा है धंधा, चिकित्सा परीक्षण में होती है अवैध वसूली, 20 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हैं लोग

एमडी ने प्राइवेट अस्पताल के बिलों में कई वर्षों से लगाए रखा है एक ही मिनिस्टीरियल स्टाफ

👉 जन सूचना मांगने पर भ्रामक एवं असत्य सूचना देकर गुमराह करता है एमडी
👉 कुछ लोगों को एमडी ने कई वर्षों से दे रखा है केवल बिल का ही काम और कुछ लोगों को चिकित्सा परीक्षण में कई वर्षों से लगा रखा है एमडी

👉 ऐसे लोगों से एमडी कराता है अवैध वसूली ,लाखों मे होता है प्राइवेट अस्पतालों के बिलों का भुगतान और होती है कमीशन बाजी

👉 रि-इंगेजमेंट में एमडी ने किया है पैसा लेकर कई लोगों को भर्ती, ऐसे लोग केवल आते हैं अस्पताल और चेहरा दिखा कर हो जाते हैं गायब

👉 ऐसे लोगों से बंधी है एमडी की माहवारी ,विजिलेंस विभाग भी आंख मूंद कर बैठा, अवैध वसूली का पैसा बिजलेेंस विभाग तक होता है बंदरबांट ,सतर्कता निरीक्षक है एमबी के दलाल ।

इलाहाबाद / प्रयागराज । केंद्रीय चिकित्सालय इलाहाबाद में एमडी के इशारे पर खुलेआम भ्रष्टाचार कई वर्षों से जारी है और चुनिंदा मिनिस्ट्रियल स्टाफ को लगाकर अपने खास सिपहसालारों के द्वारा अवैध वसूली होना जारी है ।

बता दें कि अस्पताल के बिलों में बड़े व्यापक पैमाने पर कमीशन खोरी होती है और एमडी द्वारा बिलो को प्रॉपर तरीके से चेक नहीं किया जाता है । अस्पतालों को फायदा पहुंचाया जाता है चिकित्सालय में डॉक्टर होने के बावजूद जबरदस्त अंधाधुन मरीजों को रेफर किया जाता है जिससे अनुबंधित अस्पतालों को फायदा पहुंचाया जाता है और एमडी को तथा रेफर करने वाले डॉक्टरों को लंबा कमीशन मिलता है यह धंधा कई वर्षों से जारी है ।

बता दें कि केंद्रीय चिकित्सालय में एमडी ने अपने खास सिपहसालार ओं को जिनमें एनपी गुप्ता, मौर्या ,शिव शंकर मिश्रा ,पांडे जैसे लोग केवल बिल का कार्य वर्षों से एक ही पटल का देख रहे हैं । जबकि सतर्कता विभाग द्वारा 4 साल पर कर्मचारी के जगह बदलने का प्रावधान है लेकिन ऐसा ना कर के एमडी ने अपने खास वसूली करने वाले लोगों को एक ही जगह बैठा रखा है ।

इस मामले में जन सूचना मांगने पर भी भ्रामक सूचनाएं देकर एवं झूठी सूचनाएं देकर लोगों को अवगत कराता है और गुमराह करता है जिससे भ्रष्टाचार का खुलासा नहीं हो पा रहा है । इसी प्रकार से रि-इंगेजमेंट में भी लोगों से पैसा लेकर एमडी ने कई लोगों को भर्ती किया है और लोग केवल 1 घंटे के लिए चिकित्सालय में आते हैं और चेहरा दिखाकर गायब हो जाते हैं ।

उनको ही पुनः 1 साल के लिए एमडी ने फिर से भर्ती किया है । चिकित्सालय के सारे टेंडर सीएचआई के माध्यम से बाहरी व्यक्ति से कराया जाता है जबकि चिकित्सालय में 1-1 लाख रुपए की तनख्वाह पाने वाले बाबू कार्यरत है जिनको बेवकूफ बनाकर एमडी ने उन्हें सिर्फ बिल पास करने में लगा रखा है और टेंडर में हेरा फेरी बाहरी व्यक्ति के माध्यम से करवाता है । इसके बदले में 500 रू0 प्रति टेंडर भुगतान किया जाता है ,यह पैसा कहां से दिया जाता है इसका कोई हिसाब किताब नहीं है ।

बता दें कि छोटी-छोटी हेल्थ यूनिटों में इंप्रेस के माध्यम से तथा लोकल परचेजेज के द्वारा घटिया सामान मंगाया जाता है और उसका लंबा कमीशन भी एमडी विनीत अग्रवाल डॉक्टरों के माध्यम से लेता है । लोकल परचेज में सौंदर्य एवं अन्य प्रकार के टॉनिक हर्बल दवाइयां मंगाई जाती है जो कि नियमानुसार प्रतिबंधित है इनकी सूची मंगाकर सतर्कता विभाग को जांच करनी चाहिए लेकिन आज तक बिजली विभाग द्वारा कोई जांच नहीं की गई और कितनी दवाइयां लोगों को मिलती नहीं है और एक्सपायर हो जाती है घटिया दवाइयों की सप्लाई अस्पतालों में की जाती है जिससे मरीजों को कोई फायदा नहीं होता है ।

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