Fri. Dec 6th, 2019

प्रयागराज के मुंडेरा मंडी में नहीं रुक रहा है भ्रष्टाचार,मंडी सचिव की महीने की 25 लाख से ज्यादा की है अवैध वसूली,मंडी में किसानों के लिए नहीं है सामान रखने का अड्डा,किसानों का चट्टा भी हुआ नीलाम,जिले में लगती है 5-6 जगह अवैध तरीके से थोक मंडी

आखिर कब रुकेगा मुंडेरा मंडी में मंडी सचिव का भ्रष्टाचार, मंडी के आढ़ती है परेशान ।

👉 किसानों का चबूतरा भी मंडी सचिव ने किया नीलाम, नहीं है मंडी में किसानों को सामान रखने की जगह ।
👉 मंडी में लगा है चारों तरफ गंदगी का अंबार, लाखों रुपया है मंडी का टेंडर बेकार । मंडी का पैसा लेने के बाद नहीं हो पा रही है सफाई

👉 मंडी में फिरते हैं चारों तरफ आवारा छुट्टा जानवर

👉कई करोड़ के घाटे पर चल रही मुंडेरा मंडी ,जबकि लगभग 25 लाख रुपया अवैध मंडी सचिव की होती है अवैध वसूली

👉 नीचे से ऊपर तक अवैध वसूली का पैसा होता है अधिकारियों में बंदर बाट

👉 सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश मिश्रा भी नहीं देते हैं ध्यान, सुबह से ही पूरी मंडी में लगता है जाम आढती है परेशान

प्रयागराज । मुंडेरा मंडी में व्याप्त भ्रष्टाचार मंडी सचिव के मिलीभगत से रुकने का नाम नहीं ले रहा है । यहां पर तैनात मंडी सचिव के निगरानी में मंडी निरीक्षकों की मिलीभगत से बाहर खुल्दाबाद ,नैनी, फाफामऊ ,बक्शी बांध, बैरहना आदि पर खुलेआम थोक व्यापार हो रहा है और बाहर से ट्रकों पर माल आ कर सीधा बाहर की अवैध मंडियों में उतरता है । इसके बदले में मंडी निरीक्षकों को मोटा धन दिया जाता है ।

सूत्रों की मानें तो मंडी सचिव रेनू वर्मा की महीने के लगभग 25 लाख से ज्यादा की अवैध वसूली हर आती है जो नीचे से ऊपर तक अधिकारियों तक बंदरबांट की जाती है । यही वजह है कि अधिकारी आंख मूंद कर बैठे हैं । मंडी में ₹2 लाख 65 हजार प्रति माह सफाई के नाम पर खर्च होता है लेकिन वहीं पूरे मुंडेरा मंडी में गंदगी का अंबार लगा हुआ है । फल मंडी से लेकर सब्जी मंडी तक गंदगी से पटी रहती है और यहां मंडी में आवारा पशुओं की भरमार है ,जिनको देखने वाला कोई नहीं है और जिसकी वजह से आढती परेशान हैं । इतना ही नहीं मंडी में सुबह से लेकर जाम की समस्या से मंडी व्यापारी जूझ रहे हैं, इस पर भी मंडी सचिव ध्यान नहीं दे रही है ।

इतना ही नहीं मंडी में किसानों के चट्टे भी नीलाम हो गए हैं जिस पर किसानों को कहीं भी माल रख कर बेचने की जगह नहीं है । मुंडेरा मंडी के अंदर फुटकर कारोबारी किलो 2 किलो का व्यापार करते हैं ,वही इसकी वजह से व्यापारी परेशान हैं । जबकि फुटकर व्यापारी मंडी से बाहर होना चाहिए और मंडी के बाहर खुदरा व्यापार होने की जगह थोक व्यापार हो रहा है । जिसको रोकने में मंडी सचिव एवं मंडी कर्मचारी नाकाम साबित हो रहे हैं ।अवैध वसूली का आलम यह है कि मंडी गेट पर भी खुलेआम अवैध वसूली होती जिसकी वजह से मंडी राजस्व का नुकसान हो रहा है और लगभग तीन करोड़ से ज्यादा के घाटे पर मंडी चल रही है और व्यापारियों के कई करोड़ के चेक डिशऑनर हैं । इस मामले में अधिकारी अंजान बने बैठे हुए हैं । मुंडेरा मंडी के बाहर प्रतिदिन दर्जनों ट्रक अवैध लगने वाली मंडी नैनी, खुल्दाबाद, बक्शी बांध, फाफामऊ, बैरहना आदि जगहों पर टमाटर और मटर की गाड़ियां लगती हैं और मंडी निरीक्षक इनसे वसूली करते हैं । यही वजह से इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है और नाम मात्र के लिए जब प्रशासन का चाबुक चलता है तो दिखाने के लिए एक आध गाड़ी का चालान कर दिया जाता है ।
इन मंडी निरीक्षकों को मंडी सचिव अपने चहेते मंडी निरीक्षकों को ( 4- से 6) चार से छह -छह एरियाका एक ही व्यक्ति को चार्ज दे रखा है, ताकि यह लंबी कमाई करके मंडी सचिव की झोली भर सकें ।

सूत्रों की मानें तो मंडी सचिव रेनू वर्मा की काली कमाई का कई करोड़ों की संपत्ति बना रखी है । यदि इनकम टैक्स विभाग ने जांच की तो इस अधिकारी का फंसना तर है । अब देखना यह है कि कई बार कौशांबी वॉइस एवं मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद भी अभी तक मंडी सचिव एवं इनके पालतू कर्मचारियों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है । अब देखना यह है कि कौशांबी वॉइस की खबर प्रकाशन के बाद उच्च अधिकारी संज्ञान लेते हैं या फिर इस मामले में भ्रष्टाचार से जुड़े अधिकारी की कारगुजारी फाइलों में दब के रह जाएगी या जांच का विषय है ।

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