Fri. Dec 6th, 2019

रेलवे आरडीआई मे भ्रष्टाचार का नहीं हो रहा है खुलासा ,5 माह में हो गया करोड़ों रुपए के डीजल तेल चोरी, पूर्व आरडीआई इंचार्ज गिरवरधारी श्रीवास्तव एवं सीनियर डीएमई की मिलीभगत का कारनामा

नहीं रुक रहा रेलवे में भ्रष्टाचार पीराराम ऑफिस टाइमिंग के मिलीभगत से करोड़ों के रूपवा डीजल चोरी।

जांच के बाद भी सीनियर डीएमई पर नहीं हुई कोई कार्यवाही ,आरडीए इंचार्ज का स्थानांतरण होने के बाद भी सूरजकुंड में जमा रहता है इंचार्ज गिरधारी श्रीवास्तव ।

अभी भी रहता है मौजूद आरडीआई गोदाम में आरोपी ,5 दिन बंद था सीसीटीवी कैमरा, जांच में हुआ खुलासा कई बार किए गए हैं बंद सीसीटीवी बंद कैमरे ।

आरपीएफ को मिली जांंच, आरपीएफ ने भी लगा दी फर्जी रिपोर्ट, आखिर क्यों नहीं हुई सीसीटीवी बंद कैमरे की जांच, एक ही व्यक्ति से 16 घंटे क्यों कराई जा रही थी ड्यूटी ।

इलाहाबाद । एनसीआर रेलवे के मंडलीय कार्यालय के पीछे आरडीआई सूरजकुंड में पेट्रोल पंप है जहां से डीजल इंजनों को डीजल तेल की पूर्ति की जाती है । बता दें कि यहां कई महीनों से तैनात आरडीआई इंचार्ज गिरवरधारी श्रीवास्तव और सीनियर डीएमई की मिलीभगत से करोड़ों रुपए की चार-पांच माह में तेल चोरी हो गया है । वहां के कर्मचारियों द्वारा लिखित शिकायत देने के बाद एडीएमई द्वारा जांच की गई है जिसमें रिपोर्ट में बताया गया है कि सीसीटीवी हमेशा कई कई घंटे बंद करके तेल चोरी हुआ और लगातार पांच दिन सीसी टीवी कैमरा बंद था जिसका ना किसी अधिकारियों को सूचना है ना तो किसी की परमिशन है ।

इसी प्रकार रात में आरडीआई पेट्रोल पंप में गाड़ियों से तेल उतारा जाता था जो कि सन सेट होने के बाद किसी भी हालत में बिना सीनियर अधिकारी के परमिशन के तेल नहीं उतरना चाहिए । गिरधारी श्रीवास्तव की मिलीभगत से उसके दो-तीन लोगों की लगातार 16 घंटे ड्यूटी लगाकर रात में लगाता था । इतना सब होने के बावजूद भी शिकायत कर्ताओं को सीनियर डीएमई व आरडीआई इंचार्ज ने मिलकर ट्रांसफर करा दिया और जब मीडिया में मामला हाईलाइट हुआ तो सीनियर डीएमई ने आरडीआई इंचार्ज को कागजों पर तो सूरजकुंड से हटा कर दिया लेकिन अब भी वह लगातार सूरजकुंड में बना रहता है और अपने पूर्व किए गड़बड़ी की लीपापोती कर रहा है ।

सूत्रों की मानें तो 1 नवंबर को गिरधारी श्रीवास्तव ने अपने पूर्व कमी को पूरा करने के लिए सीसीटीवी कैमरा बंद करवा कर लीपापोती किया है और लगातार वहां आकर बैठता है । इस कारनामे में सीनियर डीएमई की मिलीभगत है और उच्च अधिकारियों को भी इस लूट का पैसा बंदरबांट होने की वजह से सीनियर डीएमई पर उच्च अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं । यही कारण है कि सीनियर डीएमई अपने पूर्व किए पर लीपापोती करवाने पर आमदा है । वह बयान बदलवाने का दबाव डालता रहा है कर्मचारियों पर और कोई कार्रवाई नहीं की है और अपने मातहत शिकायत करने वाले कर्मचारियों को कई कई घंटे तक डीआरएम ऑफिस के चेंबर में बुलाकर उनका उत्पीड़न करता रहा है ।

बता दें की रेलवे को रेलवे के अधिकारी ही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और बिजलेंस विभागआंख मूंद कर बैठा हुआ है । सीनियर डीएमई पर पहले भी सिंथौली में भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं । जिस पर तत्कालीन उच्च अधिकारियों ने कार्रवाई भी की है आखिर क्यों नहीं हो रही है आरडीआई गोदाम में सीसीटीवी कैैमरा बंंद होने की जांच।

बता दें कि सिग्नल विभाग अरबों खर्चा करने के बाद सीसीटीवी कैमरे लगाने का कोई भी फायदा नहीं दिखता है क्यों की कोई भी हादसा होने पर ना तो बैकअप मिल पाता है और ना ही चोरी पकड़ में आती है तथा जांच प्रभावित हो जाती है । अंततः रिपोर्ट  निष्क्रिय हो जाती है और भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं ।

बता दें कि इस मामले में कौशांबी वॉइस की खबर का संज्ञान लेकर उच्चाधिकारियों ने आरपीएफ को जांच के लिए लगाया लेकिन r.p.f. भी कोई जांच नहीं कर सका है और चोरों की चोरी का पर्दाफाश नहीं कर सका है बल्कि उनको क्लीन चिट दे दी है । जबकि हर माह 25 लाख रुपए की डीजल चोरी लगातार होती रही है। सूत्रों की मानें तो उच्च अधिकारियों ने इस चोरी की लीपापोती करने के लिए कई कर्मचारियों को आरडीआई से कई कर्मचारियों को ट्रांसफर कर दिया है और इस मामले में जांच कर रिपोर्ट लगाने वाले एएमई को भी ट्रांसफर कर दिया गया है ।

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