Sat. Nov 16th, 2019

जिले में जल निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार, हो गया करोड़ों का घोटाला ,नई हुई कोई जांच

पाइप की क्वालिटी में हेरा फेरी कर करोडो का किया घोटाला

आलाधिकारियों के चुप्पी साधने के मामले की जांच हुई तो सहायक अभियंता अधिशासी अभियंता के साथ साथ मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर गाज गिरना तय

38 किलोग्राम वजन का सरकारी खजाने से निकाल लिया बजट 19 किलोग्राम वजन का डाल दिया पाइप लाइन

होहल्ला मचाने वाले भाजपा नेताओं के मुँह में आखिर क्यों जम गया दही

कौशाम्बी । जल निगम में कार्यो की गुणवत्ता में हेरा फेरी कर विभागीय अधिकारी मालामाल हो रहे है। इसी का नतीजा है कि गांव गांव पानी सप्लायी के लिए पडने वाली पाइप लाइने तुरन्त लीकेज हो जाती है लेकिन जल निगम में भ्रष्टाचार इस कदर हाबी है कि आम जनता जन प्रतिनिधियो के शिकायत के बाद भी इन अधिकारियो पर कार्यवाही होती नही दिख रही है । जॉच के नाम पर विभागीय अधिकारी भ्रष्ट अधीनस्थों को बचाने का भरसक प्रयास करते है । यहॉ तक की जॉच के दौरान आलाधिकारियो को झूठी और मनगढंत रिर्पोट भेजकर विभाग के उच्च अधिकारी अधिनस्थो से अपना हिस्सा वसूल उन्हे बाइज्जत बरी कर देते है ।

जल निगम विभाग में सरकारी रकम डकारने में पूरा रैकेट लगा हुआ है ठेकेदार से लेकर अधिकारी तक योजना में शामिल है। जिसके चलते केन्द्र और प्रदेश सरकार की करोडो रूपये की विभिन्न योजनाओ का लाभ आम जनता तक नही पहुच पाता है।

जिसका नतीजा यह है कि आम जनता समस्याओ से त्रस्त रहती है। इसी के चलते जनता जनप्रतिनिधियो और सरकारो पर अपना गुस्सा उतारती है प्रदेश से लेकर जिले तक हुए तमाम घोटालो में पूरब शरीरा पाइप लाइन बिछायें जाने की योजना का उदाहरण ही विभाग के भ्रष्टाचार की कलई खोलने के लिए पर्याप्त है।

गौरतलब है कि योगी सरकार के बनते ही पूरब शरीरा गांव में घर घर पानी पहुचाने के उद्देश्य से भाजपा की योगी सरकार के निर्देश पर पूरब शरीरा में जल निगम की टंकी और पाइप लाइन बिछाये जाने की योजना के तहत 4 करोड की रकम विभाग ने स्वीकृत कर दी। लगभग डेढ वर्ष के बीच सहायक अभियंता की देखरेख में यह कार्य पूर्ण हो गया ।

लेकिन कार्यदायी संस्था के कार्यो के समय से लेकर वर्षो तक विभाग के भ्रष्टाचार की डीएम कमिश्नर से लेकर शासन सत्ता तक ग्रामीणो ने शिकायत की इस गांव में कई भाजपा नेता केन्द्रीय और प्रान्तीय मंत्रीयो के आगे पीछे घूमने वालो में शामिल है ।

पहले तो उन्होने भी पेयजल पाइप लाइन योजना में हेरा फेरी घोटाले की आवाज उठायी लेकिन बाद में उनके मुॅह में दही जम गया। सूत्रो की माने तो योजना के तहत 65 एमएम का 20 फुट पाइप 38 किलोग्राम वजन का डाला जाना था लेकिन बजट तो 38 किलोग्राम वजन का सरकारी खजाने से निकाल लिया गया और सूत्रो की माने तो 19 किलोग्राम का पाइप लाइन डाल दिया गया है जिसके चलते यह पूरी पाइप लाइन लीकेज हो चुकी है।

विभागीय आकडो पर गौर करे तो पाइप लाइन के वजन की हेरा फेरी कर विभागीय अधिकारियो ने करोडो की रकम तिजोरी तक पहुचायी है। जिस सहायक अभियंता के जमाने में पाइप लाइन बिछायें जाने में करोडो का घोटाला हुआ है उस घोटालेबाज सहायक अभियंता को सरकार ने अधिशाषी अभियंता का पद तोहफे में सौप दिया है। जिससे शासन सत्ता में बैठे अधिकारियो की मंशा पर भी सवाल उठना लाजमी है।

योजना के तहत गांव में लगभग 30 किलो मीटर पाइप लाइन बिछाया जाना था लेकिन पाइप लाइन बिछायें जाने में भी हेरा फेरी किये जाने की चर्चा तेजी से है। पाइप की क्वालिटी में हेरा फेरी कर सरकारी रकम के हिस्से बाट को लेकर विभाग में ही खीचातानी शुरू हो गयी जिसके चलते विभागीय कर्मचारियो और अवर अभियंता अब विभागीय भ्रष्टाचार की चर्चा खुलेआम करने लगे है।लेकिन बार बार शिकायत के बावजूद तत्कालीन सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंता के करोडो के भ्रष्टाचार उजागर नही हो सके है ।

जबकि पडोसी जनपद प्रतापगढ में पाइप लाइन योजना में घोटाले के आरोप में जल निगम के अधिशाषी अभियंता को निलम्बित किया जा चुका है आखिर कौशाम्बी के सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंता के भ्रष्टाचार पर मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने चुप्पी क्यों साध रखी है यह बडा सवाल है और यदि आलाधिकारियो के चुप्पी साधने के मामले की जॉच हुयी तो सहायक अभियंता अधिशाषी अभियंता के साथ साथ मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर गाज गिरना तय है लेकिन क्या योगी राज में जल निगम के करोडो के घोटाले पर निष्पक्ष जॉच हो पायेंगी। यह बडा सवाल लोगो के जेहन में कौध रहा है।

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