Fri. Dec 6th, 2019

रेलवे उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर में भ्रष्टाचार चरम पर , सीएमएस और ACMS द्वारा किया जा रहा है पक्षपात, अलीगढ़ ,खुर्जा, टूंडला, इटावा में भी भ्रष्टाचार

रेलवे के उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर में सीमस द्वारा किया जा रहा है पक्षपात

अलीगढ़ ,टूंडला, खुर्जा ,इटावा अस्पताल में डॉक्टरों की है मनमानी ,फार्मासिस्ट चलाते हैं अस्पताल

रेलवे एनसीआर में बैठे सीएमडी और एमडी तक पहुंचती है अवैध वसूली की माहवारी रकम

रेलवे एनसीआर इलाहाबाद के अंतर्गत उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है । जहां पर सीएमएस और एसीएमएस द्वारा पक्षपात किए जाने से काफी कर्मचारियों को परेशानी हो रही है । यहां कई सालों से जमे डॉक्टर मनमानी तरीके से नौकरी कर रहे हैं और अपने मातहत कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं ।

बता दें कि 26 अगस्त को इमरजेंसी ड्यूटी में डॉक्टर रेखा यादव की ड्यूटी में एक डिलीवरी केस कराया गया और एक डिलीवरी केस स्टेशन पर डा0 अवस्थी ने कराया लेकिन सीएमएस और एसीएमएस ने उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना देकर डॉ रेखा यादव को 5000 का नगद पुरस्कार दिलाने का कार्य किया है । जबकि वहीं डॉ0 अवस्थी के किए गए कार्यों को दरकिनार कर दिया गया है । इस तरीके का पक्षपात कानपुर में वर्तमान सीएमएस और एसीएमएस हर स्तर पर सभी कर्मचारियों के साथ व्यवहार कर रहे हैं । उच्च अधिकारियों के द्वरा यहां इसकी जांच कराकर इस पर पार्टी को समाप्त किए जाने की आवश्यकता है ,अन्यथा कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा एवं असमानता उत्पन्न होगी जो प्रशासन के लिए ठीक नहीं है ।

बता दें कि डॉक्टर रेखा 20 वर्षों से कानपुर में डॉक्टर है और उप मंडलीय चिकित्सालय कानपुर में ही तैनात है । इनके कार्यकाल में किए गए कार्यों की जांच कराए जाने की आवश्यकता है । सीएमएस पी0के0 सरदार लगभग 3 वर्ष से तैनात हैं लेकिन एसीएमएस के साथ मिलकर मनमानी कार्य कर रहे हैं ,जिससे चिकित्सालय की छवि खराब हो रही है । क्योंकि पिछले 20 वर्षों से रविंद्र प्रसाद के सारे काले कारनामे उजागर हैं और यह हर काले काले कारनामों को करने के एक्सपर्ट भी हैं ।

बता दें कि इसी प्रकार टूंडला में भी 12:00 बजे के बाद अस्पताल पूर्ण रूप से बंद हो जाता है और कुछ लोग अपनी मनमानी करके धन उगाही करते हैं । गार्ड और ड्राइवरों की पीएमई होती है जिससे इन लोगों से सुविधा शुल्क लिया जाता है और अंधों को पास किया जाता है । अगर जांच कराई जाए तो कलर ब्लाइंड के केस में कई केस उजागर होंगे ,जो रेलवे सुरक्षा की धज्जियां उड़ाते हैं ।

इसी प्रकार अलीगढ़ ,खुर्जा , इटावा में भी मरीजों के द्वारा शिकायत मिलती है कि डॉक्टर अस्पताल नहीं आते हैं । यहां पर फर्मासिस्टो के द्वारा अस्पताल चलाया जा रहा है । शिक और फिट के रोजाना हजारों रुपया का बंटवारा होता है । कानपुर सीएमएस निरीक्षण के नाम पर साल में एक बार पूर्व सूचना देकर चले जाते हैं जिस पर सारी चीजे दुरुस्त मिलती है । उनके आने की सूचना होने पर सब अलर्ट हो जाते हैं और CMS महोदय इंफेक्शन करके चले जाते हैं ।  बाकी सारा कार्यक्रम वैसे के वैसे ही यहां चलता रहता है । यदि एनसीआर के उच्च अधिकारियों ने जांच कराई तो यहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर होगा और वर्षों से जमे कर्मचारी व अधिकारी रेलवे को दीमक की तरह चाटने का काम कर रहे हैं ।

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