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पति की हत्या  का  पुलिस नहीं लिख रही है रिपोर्ट । मृतक के परिजनों ने  लगाई मुख्यमंत्री से गुहार

बालू माफियाओं की आपसी वर्चस्व की जंग में हुई थी झल्लर की मौत । खनन माफिया के चंगुल में कौशांबी

जिला प्रशासन खनन माफियाओं पर नहीं करता कोई कार्रवाई । काके सरदार बालू माफिया पर रिपोर्ट दर्ज कराने  की मांग, झल्रर चौबे की हुई थी निर्मम हत्या ।

कौशांबी जनपद मे अपराध बढ चढ़कर बोल रहा है यहां तक की हत्या होने के बाद भी पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज कर रही है लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी के दरबार में मृतक के परिजनों ने  गुहार लगाई है ।  बता दें कि 1 माह पूर्व कौशांबी जनपद के थाना पश्चिम शरीरा इलाके के कटरी  डढावल गांव में झलर चौकी के  कुछ लोगों ने  मारपीट कर जिंदा जलाने का प्रयास किया था । वहीं पुलिस के पहुंचने के बाद  उसे  अधजले  हालत में  जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी । इस घटना  की सूचना मृतक के परिजनों ने थाने में दी लेकिन पुलिस ने आज तक रिपोर्ट नहीं दर्ज किया है जिससे वे लोग अधिकारियों के यहां  चक्कर काट रहे हैं । बता दें कि पुलिस ने  चौकीदार से तहरीर लेकर मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था लेकिन चौकीदार ने हलफनामा देकर कोर्ट में  f.i.r. ना कराने की बात कह कर के रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है ।  दिनांक  27  मार्च को  मृतक  की पत्नी व बच्चे  लखनऊ में  मीडिया के सामने  आकर  बताया कि  कौशांबी में काके सरदार नामक बालू माफिया को पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता व जिला प्रशासन मिलकर बचा रहे हैं और अभी तक उनकी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई है । परिजनो ने काके पर लगाया है हत्या मे सामिल होने का आरोप ।

जिले में खनन माफियाओं के आपसी वर्चस्व में एक महीने पहले एक 45 साल के व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया था, कई दिन बाद उसकी मौत हो गई । अब उसकी पत्नी दर दर की ठोकरें खा रही है । स्थानीय पुलिस ने अब तक परिजनों से प्रार्थना पत्र तक नही लिया । स्थानीय विधायक जो प्रदेश के उप मुख्यमंत्री के करीबी है, उनका दबाब भी है इस मामले में ऐसा बताया जा रहा है । फिलहाल मृतक राम स्नेही चौबे के बच्चे कल से लखनऊ में इंसाफ के लिए भटक रहे है । परिजनों का कहना है कि कौशाम्बी के खनन माफिया एक सरदार ने सबको खरीद लिया है जिसकी वजह से अब कही भी उनकी सुनवाई नही हो रही है ।  मृतक की पत्नी व बच्चे अपने पिता की तस्वीर को देख देख कर बेहोश हो जा रहे थे ।


बता दे कि इन खनन माफियाओं के घाटो पर रोज सैकड़ों गाड़िया स्थानीय सत्ता पक्ष के लोगो को  बालू फ्री में दी जाती है । इन बालू घाटों से ओवरलोड बालू लदी गाड़ियां दिन रात सड़कों पर फर्राटा मारती रहती हैं जिससेेे कई करोड़ की लागत सेेे ब बनी सड़कें ध्वस्त हो गई है लेकिन जिला प्रशासन इन बालू माफियाओं पर कोई भी कार्यवाही नहीं करता है  और सत्ता पक्ष के आगे जिला प्रशासन सब नतमस्तक हैं ।

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